भय के साए में मनुष्यता को लील रहा है कोविड – 19

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कोविड -19 ने मनुष्यता को निश्चित ही भय के साए में धकेल कर एकांकी जीवन जीने को मजबूर कर दिया! इससे और अधिक क्या हो सकता है कि, पिता अपने पुत्र की कोविड से मृत्यु हो जाने पर पास -पड़ोसी नाते -रिश्तेदार कोई मदद् के लिए आगे नहीं आए तो, पिता स्वयं बेटे की मृत काया को दाह -संस्कार के लिए ठेले पर रख स्वयं अकेले धकेलते हुए श्मशान में दाह संस्कार करता है! जीवन कितना अजीब एकांकी हो चला है, इस महामारी का दर्द कब तक बना रहेगा यह कहना मुश्किल है ? लेकिन पिता के आत्मविश्वास ने यह जता दिया कि, हिम्मत से ही जीवन में अकेले रह कर भी आगे बढ़ा जा सकता है न कि किसी के सहारे या आश्रय से?

लोग आपके साथ तब तक रहेंगे ,जब आप संकट में न घिरे हो ! धर्मभीरू लोगों का यहाँ बस नहीं चल रहा है, अन्यथा अंधविश्वास से बंधी रूढी़याें को ढोने के लिए मजबूर कर देते?

मनुष्यता के बिगड़े स्वरूप छल -कपट धोखे में शुद्धता लाने के लिए प्रकृति ने इस महामारी में धकेला है, अब मृत्यु का भय ही जीवन में शुद्धता लाएेगा! एक नया जीवन जीने के नये नियम होंगे! अंधविश्वास और आडंबर से बचना होगा सामाजिक रीति-रिवाज महिमा मंडन व्यर्थ हो चुके हैं ! यह कोविड -19ने समाज को सचेत रहने का संदेश दिया है कि, आगे का जीवन आप कैसे जियेंगे ?
खैर जीवन का यह सबसे बड़ा संघर्ष है, इससे गुजरने के पश्चात नये नियमों के साथ जीने के नियम बनाना चाहिए! लोग कब आपके साथ रहेंगे और कब नहीं ? इस पर आप अपना सुरक्षित जीवन कैसे जीऐं यह तय करेंगे!


यह तो तय है कि हम इस कष्टप्रद कोरोना की जंग से जितेंगे ऐसा आत्मविश्वास लिए हुए उर्जावान बने रहें ,निश्चित ही इस ग्रस्त महामारी से निजात पा ही लेंगे और फिर से विश्वास लिए हुए सामान्य जीवन जीने की उम्मीद लिए हुए आगे बढ़ेंगे ! हौसला ही आपकी जिंदगी की कोशिश को जिंदा रखेगा ! नकारात्मक भावों से मन को दुर्बल न कर सकारात्मक ऊर्जा ही कोविड -19 के प्रभाव को कम करेगी!

प्राणलेवा कोविड से बचने के लिए अपना आत्मबल व हौसला बनाए रखें !लापरवाही से कोविड को अपने पेर न पसारने दे ! आज जीवन एकाकी होता चला है मूल्यजनित व्यवस्थाओं में भी मनुष्यता का जीना दूभर हो चुका है ! प्रकृति ने जीवन मूल्य को सस्ता कर एकाकी जीवन जीने को मजबूर किया है, लेकिन एक आशान्वित दृष्टिकोण लिए हुए ईश्वर में आस्था रखते हुए, एक दिन हम विजेता हो कर, इस महामारी से उभरेंगे यही उम्मीद की किरण लिए हुए हमारे जीवन को संवारेगी !

 बालमुकुंद नागर (धाकड़ )

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Author: बालमुकुंद नागर (धाकड़ )