किराड़ समाज जातीय जागरण की जन्म स्थली ग्वालियर

ग्वालियर। अ .भारतीय किराड़ समाज के इतिहास में ग्वालियर का अपना विशेष महत्व है। ग्वालियर को किराड समाज की जातीय जागरण की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है । ऐसा किराड़ क्षत्रिय संदेश पत्रिका के अंकों को पढकर ज्ञात हुआ है।

ग्वालियर के बाबू श्री उत्तम सिह और आगरा के बाबू शिवप्रसाद जी ने जेठ वदी 2 सवन्त 1976  दिनांक 12/5/1919 को हजीरा नामक स्थान पर ग्वालियर में अ. भारतीय किरार समाज का सर्वप्रथम सम्मेलन आयोजित किया था संगठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए समाज इन दोनों महापुरुषों का सदैव ऋणी रहेगा।आज दोनों ही स्वनाम धन्य महामूर्तियां हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके आदर्श, प्रेरणायें हमेशा समाज को मार्गदर्शन करती रहेगी।

द्वितीय अ. भारतीय किराड़ समाज सम्मेलन 1920  में सांडिया घाट होशंगाबाद में सेमरीतला के स्व. श्री धन्नालाल जी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित किया गया था यह किराड़ समाज के इतिहास का महत्वपूर्ण एवं गौरवमयी आयोजन था हस सम्मेलन में भारत के कोने-कोने से आये लगभग 1600 किराड़ समाज बन्धुओं ने भाग लिया। अ. भा. स्तर पर समाज को एकत्र करने का सर्वाधिक सुनियोजित सफल प्रयत्न था। स्व. चौ. धन्नालाल जी अपनी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से किराड़ समाज के इतिहास निर्माताओं में अपना बहुत ऊँचा स्थान बना गये।

अ.भा. किराड़ समाज के 192 में दो क्षेत्रीय सम्मेलनों का आयोजन दो स्वजातीय सन्यासियों के सद्प्रयत्नो से हुआ । एक स्व. महन्त रघुनाथदास जी की प्रेरणा और प्रयत्नों से दिगुवा (दतिया) में क्षेत्रीय सम्मेलन श्री सुंदरलाल महते की अध्यक्षता में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । दूसरा स्व. पूज्यपाद श्री भोलानाथ जी के सद्प्रयत्नो से आगरा के दलिहार्ह में सफलतापूर्वक गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुआ ।

ग्वालियर में बाबूउत्नम सिंह के सहयोगी ठाकुर इन्द्रजीत सिंह जी के सद्प्रयत्नो से अ. भारतीय किराड़ समाज का  सम्मेलन 1930 में हजीरा ग्वालियर में आयोजित किया था इस सम्मेलन में “श्री यदुवंशी राजपूत ग्वालियर राज्य ”  का जन्म हुआ। यह सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। आगरा में स्व. पूज्यपाद श्री भोलानाथ जी के प्रयत्नों एवं प्रेरणा से 1938 में किरार समाज का सफल सम्मेलन हुआ जिसमे ” किरार क्षत्रिय सुधर्मा ” सभा की स्थापना हुई और यह एक प्रेरणादायी सफल सम्मेलन रहा ।

मुरैना । श्री यदुवंशी राजपूत महासभा ग्वालियर राज्य का वार्षिक अधिवेशन 1941 में मुरैना में लेफ्टीनेंट कर्नल राजा पंचम सिह जी महाड़गढ़ मुरैना की अध्यक्षता हुआ। इस अधिवेशन में एक छात्रावास स्थापित करने का निर्णय किया और उसके लिए भूमि क्रय की गई । इस भूमि यर कुछ विवाद की स्थिति के कारण व अन्य कारणों से छात्रावास की योजना अभी तक मूर्तरुप नहीं ले सकी है किन्तु अब इस भूमि यर सुन्दर गार्डन तैयार हो गया है आय शुरू हो गईं है अब उम्मीद जगी है कि शीघ्र ही छात्रावास भी मूर्तरूप ले सकेगा ।

नागपुर । किराड़ क्षत्रिय समाज का 21 जनवरी १९५५ को नागपुर में म. प्र. किराड़ क्षत्रिय समाज का अधिवेशन उल्लेखनीय रहा है इस सम्मेलन का उद्घाटन म. प्र. के समाज कल्याण मंत्रो मान. श्री दीनदयाल गुप्त जी ने किया था । अध्यक्षता श्री जगन्नाथ आशाराम दरोडे नागपुर ने की स्वागत समिति के मंत्री श्री हीरालाल उपासराव महादुले थे, के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।

ग्वालियर । श्री यदुवंशी किरार राजपूत महासभा (रजि.) म. प्र. का 18 व 19 जून 1960 को किरार समाज की स्वजातीय धर्मशाला हजीरा ग्वालियर में अधिवेश सम्पन्न हुआ । इस सम्मेलन की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष श्री नकटू सिह जी नयागांव ने को थी ।

भोपाल । लक्ष्मी निवास मारवाडी रोड भोपाल में एक जातीय संगोष्ठी 3 अप्रैल 1966 को हुई जिसमें अ.  भा. किरार महासभा की स्थापना एवं विधान का प्रारूप तैयार किया तथा अधिवेशन हेतु एक तदर्थ समिति श्री बिहारीलाल पटेल की अध्यक्षता में बनी ।

ग्वालियर – अधिवेशन कराने हेतु दिनांक 9 अप्रैल  1966 को मेजर गजाधर सिह जी के निवास पर श्री यदुवंशी किरार राजपूत महासभा म.प्र. की कार्यकागरिणी को बैठक हुई जिसमें अधिवेशन के लिए स्वागत समिति का अध्यक्ष महासभा अध्यक्ष श्री नकटू सिह जी को बनाया गया तथा अधिवेशनक हेतु 4 व 5 जून 1966 की तिथि निर्धारित की । अ. भा.  किरार क्षत्रिय महासभा के विधानानुसार द्विवार्षिक अधिवेशन के अध्यक्ष वयोवृद्ध राव साहब रघुनाथ

गुलाबदास किराड़ भू. पू. डिप्टी चेयरमैन नगरपालिका पूना एवं अ. भा नवयुवक संघ के अधिवेशन के अध्यक्ष प्रख्यात समाजवादी नेता भू. पू. मेयर नगर महापालिका पूना के मान श्री सरदार एम. किराड़ मनोनीत हुए ।

अधिवेशन की व्यवस्थाओं हेतु स्वागत समिति के अन्तर्गत कार्यं विभाजन कर अन्य समिति या गठित की जिसमें

1. अर्थ समिति- इसमें श्री मेजर गजाधर सिह व शिवचरण सिह जी को जिम्मेदारी दी ।

2 . प्रचार समिति का अध्यक्ष श्री प्रेमनारायण आगरा को बनाया ।

3. प्रबंध समिति अध्यक्ष श्री केशव सिह जी कछोआ को बनाया ।

4. स्वयंसेवक समिति का संयोजक श्री लखपत सिह पुत्र श्री मेजर गजाधर सिह को बनाया।

सभी अपने-अपने कार्य में जुट गये। सीमित समय में अर्थ समिति ने पर्याप्त धन संचय मेजर गजाधर सिह एवं श्री शिवचरण सिह के विश्वसनीय व्यक्तित्व एवं व्यवहार कुशलता से ही सफलता मिली । अधिवेशन स्थल चेम्बर  आँफ कॉमर्स भवन, अतिथियों को ठहरने, भोजन की व्यवस्थाओं से दर्शक व अतिधि मेहमान प्रभावित थे यह श्री केशव सिह जी की त्याग तपस्या का फल था। स्वयं सेवक दल का नेतृत्व व कार्यवाही का संचालन के सेहरा श्री लखपत सिह के सिर बँधा। तो प्रचार-प्रसार ऐसा कि ग्वालियर चली आह्वान का उत्साहजनक प्रत्युत्तर मिला जिसने पूरे भारतवर्ष के किराड़ समाज को ग्वालियर तक ला दिया देश के सभी क्षेत्र एवं जिले ग्वालियर चली आह्वान से गूंजते रहे जिसका श्रेय श्री रामनारायण जी को जाता है । इस अधिवेशन में विभिन्न प्रदेशों तथा जिलों से 1500 प्रतिनिधि एवं 200 स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित थे । सभी के ठहरने एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था थी यह प्रथम अधिवेशन ऐतिहासिक अधिवेशन रहा । इसमें श्री राय साहब रघुनाथ गुलाबदास जी किराड़ पूना अध्यक्ष बने। अ. भा. किरार क्षत्रिय महासभा का द्वितीय अधिवेशन 3 जून 1968 को बांरा  में आयोजित हुआ इस अधिवेशन में श्री जीवन लाल प्रशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही यह अधिवेशन भी राजस्थान की परम्परा के अनुसार बहुत ही सफल रहा। इस अधिवेशन में श्री राय साहब रघुनाथ, गुलाबदास जी किराड़ पूना को चुन: अध्यक्ष मनोनीत किया गया।

तृतीय अधिवेशन 29 मई 1973 को गाम बकतरा जिला सीहोर म. प्र. में हुआ यह अधिवेशन श्री बिहारीलाल पटेल के नेतृत्व में आयोजित किया गया था बैठक की सभी व्यवस्थाएं बहुत ही सुन्दर आकर्षक थी सभी मेहमानों को ठहरने की व भोजन की उचित व्यवस्था की गई थी । इस अधिवेशन में बी बिहारीलाल पटेल बकतरा तीन वर्षों हेतु महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद यर ताजपोशी हुई और सभी ने उन्हें बधाई दी।

चतुर्थ अधिवेशन 6 जून 1974 को उतार प्रदेश के आगरा जिले के ग्राम देहगंवा में आयोजित किया गया था । इस अधिवेशन की व्यवस्थाएं रमणीक सुन्दर व्यवस्थित की गई थी । इस अधिवेशन में श्रीमती राजमाता भी पधारी थी इसमें राजमाता ने किरार समाज को ईमानदार, कर्मठ, जुझारु समाज बताया आपने श्रीमती स्वर्णलता जी को विशेष महत्व दिया । हस अधिवेशन में ग्राम खुशिधारा जिला बांरा के श्री जीवनलाल प्रधान को महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी से नवाजा गया । जीवन लाल सक्रिय कर्मठ लगनशील समाजसेवी है ।

पांचवा अधिवेशन म. प्र. के शिवपुरी जिले में 6 मई 1978 को श्री जीवनलाल प्रधान की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ इस अधिवेशन में श्री जीवनलाल प्रधान को पुन: अध्यक्ष पद की ताजपोशी हुई।

छठा अधिवेशन 12 मार्च 1983 को थोड़े विलम्ब के साथ बरेली जिला रायसेन म.प्र. में हुआ इस अधिवेशन की अध्यक्षता श्री जीवनलाल प्रधान ने की यह क्षेत्र किरार बाहुल्य क्षेत्र होने से एवं संपन्न कृषक होने से सुन्दर आकर्षक व्यवस्थाओं में हुआ खाने एवं ठहरने की सुन्दर व्यवस्थाएं की गई थी। इस अधिवेशन में चौ. प्रणचीर सिह सेमरीतला को सर्व सम्मति से अध्यक्ष बनाया गया। चौ. प्रणचीर सिह ने कुछ समय तो जायं किया लेकिन कुछ समय बाद हो उनका स्वास्थ्य बिगडा और वे चिर निद्रा में लीन हो गये । इनके स्थान पर महासभा के वरिष्ट उपाध्यक्ष श्री लाल सिह जी को शेष कार्यकाल के लिए अध्यक्ष मनोनीत कार्यकारिणी में किया गया।

सातवां अधिवेश 25 -26 मई 1985 को महाराष्ट्र के रामटेक नागपुर में आयोजित, किया गया इस सम्मेलन की अध्यक्षता श्री लाल सिह मटैल ने की यह अधिवेशन समाज की धर्मशाला में हुआ था यहीं ठहरने खाने पीने की उचित व्यवस्था थी। नागपुर से लोगों को रामटेक तक के लिए कन्वेश की व्यवस्था की। यहाँ अध्यक्ष पद हेतु दो प्रत्याशी श्री दीवान सिह गुना एवं श्री राल सिह पटेल में प्रतिस्पर्धा रही, काफी जदोजहद के बाद श्री राल सिह पटेल को सर्वसम्मति है अध्यक्ष मनोनीत किया गया।

आठवां अधिवेशन काफी अन्तराल के बाद 5-6 मई 2001 को लाल  घाटी भोपाल में हुआ । इस समय भोपाल में श्री राजकुमार पटेल विधायक ने बहुत ही अच्छी व सुन्दर व्यवस्था की थी बहुत ही लम्बा चौडा पंडाल था होटलों धर्मशालाओं में ठहरने एवं खाने की व्यवस्था की गई थी। यह अधिवेशन काफी अन्तराल के बाद हुआ था इसलिए अधिवेशन में समाज बन्धु बहुत बडो संख्या में थे । इस अधिवेशन में अध्यक्ष पद हेतु 5- 6 नाम थे सामंजस्य बनाने हेतु एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई जिसमे  सर्वसम्मिति से डॉ. बलवंत सिह ग्वालियर को राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया।

नवम् अधिवेशन-समय से 2-3 जुलाई 2005 को पुणे में हुआ इस सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. बलवंत सिंह जी ने की पूना शहर क्रो दुल्हन की तरह सजाया गया था। लोगों को ठहरने एवं खाने की उक्ति व्यवस्था की गई थी। सम्मेलन व्यवस्थित रुप से चला। अध्यक्ष के चुनाव के समय 5 – 6 प्रत्याशी अध्यक्ष की कतार में थे अन्तिम समय  में दो प्रत्याशी डॉ. गुलाब. सिह भिण्ड एवं सोमनाथ किराड़ पूना थे फाफी मान मनोबल के बाद दोनों ही नहीं माने अन्त में सोमनाथ के साथ पूना के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया चूंकि चुनाव प्रक्रिया चालू थी अत: चुनाव अधिकारी ने डॉ. गुलाब सिंह जी को अध्यक्ष मनोनयन की घोषणा । डॉ. गुलाब सिह जी भी लगभग १० वर्षों तक अध्यक्ष रहें दो बार राष्ट्रिय अधिवेशन की घोषणा व तैयारियां पूर्ण होने तथा अधिवेशन अंतिम चरण में आकर सागोद अधिवेशन स्थगित हुआ । उसके बाद विजयपुर में तय हुआ यह अधिवेशन भी 4 दिन पूर्व स्थगित कर दिया गया इस प्रकार यह कार्यकाल भी लम्बा चला।

दसवां अधिवेशन बरेली जिला रायसेन में दिनांक 2 व 3 मार्च 2015 को हुआ इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गुलाब सिह किरन ने की मुख्य अतिधि मान. शिवराज सिह चौहान मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन थे । इस अधिवेशन में अध्यक्ष हेतु 7-8 नाम थे अंतिम समय में तीन

1. श्री शिवानी पटेल बरेली,

2. प्रेम सिह पटेल बकतारा तथा

3. श्रीमान सिंह राजपूत ग्वालियर थे ।

इनमें आपसी सहमति न बनने से एक सात सदस्यीय समिति बनाई जिसे अध्यक्ष मनोनयन हेतु तीनों प्रत्याशियों से  चर्चा कर समिति को अध्यक्ष मनोनीति करने का अधिकार दिया। इस समिति ने श्री शिवानी पटेल को अध्यक्ष मनोनीत किया । शेष तो प्रेम सिह पटेल व श्री मान सिह ग्वालियर ने इस मनोयन का विरोध किया । विरोध के बाद भी शिवजी पटेल अध्यक्ष मनोनीत हुए । और वे ही महासभा का कार्य देख रहे हैं ।

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Author: Kirad