भयावह त्रासदी के दौर में किया गया सहयोग, इंसानियत के लिए,किसी वर्दान से कम नहीं?

संकट के इस चुनौतीपूर्ण दौर में मन चिंतायुक्त और भयप्रद हो, ऐसे वक्त पर कोई संवेदनशील व्यक्तित्व तटस्थ हो कर, सेवा का भाव लिए खड़ा हो जाए, उस त्रासदी से निजात पाने, अशांत मन को विचलित अवसाद से उभारने के लिए, त्वरित सेवा मिल जाए, उसके माध्यम से दी गई सेवा जीवनभर व्यथितमन की गहराई में ,उसकी सेवा को अंतर्आत्मा से ईश्वरीय रूप में देखा जाता है,जिसे जीवन भर अपनी स्मृति में संजोए रख, मनुष्यता पर भरोसा पैदा किया जा सके!


सृजन कार्य वही है जो त्रासदी में काम आए, जिसे कभी अंत:करण के भाव लाख कोशिश करने पर भी भूला न सके! कभी -कभी प्रकृति भी मनुष्यता के बिगड़े स्वरूप की सेवा का आंकलन करने के लिए त्रासदी में धकेलती है, जिससे संकट के पूर्व क्षीण हुए अपनेपन के भावों को फिर से जीवित किया जा सके?


यही सामाजिक सरोकार की श्रेष्ठतर बुनियाद है, जो मानवीय मूल्यों को जाग्रत कर, नव जीवन की और अग्रसर होने का अवसर प्रदान कर, आपकी सेवा का मूल्यांकित द्रष्टिकोण उजागर करती है!
अभी हाल ही में 14अप्रेल 2020 को नीमच जिले के कंजार्डा के पास झोपड़िया गांव की घटना है, जिसमें बेटी शिवानी एवं पिता बाबूलाल धाकड़, अपनी आर्थिकदशा से उभरने के लिए अपने खेत में तैयार गेहुं की फसल निकालने के लिए रात और दिन काम करते रहे,जिसमें बेटी ने भी हाथ बटाया पिता थ्रेशर मशीन में गेहुं निकाल रहे थे, लेकिन बेटी मशीन के पास ही काम कर रही थी अचानक ध्यान न रहने से बेटी के बाल मशीन में उलझने से गंभीर चोट आई, जिसे तत्काल उदयपूर राजस्थान अस्पताल में भर्ती करवाया गया! किसान की आर्थिक दशा और त्रासद हो गयी बजाय उभरने के ?
इस संकट की घड़ी में कंजार्डा के समाज सेवी सुनील धाकड़ एवं अन्य सहयोगी के द्वारा ‘अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा ‘ की अध्यक्षा श्रीमति साधना सिंह जी से संपर्क किया गया,उन्होंने तत्काल नीमच कलेक्टर को फोन कर उदयपूर संपर्क कर ,उसे निशुल्क इलाज मुहैया करवाने की पहल की, जिसमें लाखों रुपये का खर्च आना था, लेकिन वह निशुल्क किया जा रहा है!


नारीशक्ति की त्वरित पहल ने किसान की बेटी का समय पर इलाज होने से जीवन बच पाया! मौजूदा समय के त्रासदमय संकट से उभारना, यही मानवीय संबंधों को जीवित रखना बड़ा योगदान होकर बेहद अहम है! इसकी जीतनी सराहना की जाए, उतनी कम है! संकट के समय सहयोगी बन चुनौतियों से लड़ने की हिम्मत पैदा कर देना, उसके आत्मविश्वास की उर्जा को जगा देना साहसिक कार्य है!


नारीशक्ति के इस सेवा भावी नेतृत्व ने ‘अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा ‘ का महत्व बढ़ाया है! ऐसे संवेदनशील निर्णय से समाज ‘महासभा ‘ को आशान्वित दृष्टिकोण से देखेगा और नेतृत्व की निष्ठा के प्रति समाज समर्पित भाव से सहयोग की भावना लिए हुए खड़ा रहेगा!
वर्तमान समय में महासभाओं ‘ के भविष्य पर जो प्रश्नचिन्ह लग रहा था, उसका समाज में जो महत्व कम आंका जा रहा था, उसे किरार ‘महासभा’ की अध्यक्षा साधनाजी ने आत्मीय पहल कर ‘ नारीशक्ति का द्रवित निश्चल मन ने सेवा के महत्व को बढ़ाया है! समाज को ऐसे सुसंस्कृत सेवाभावों की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी!


समाज ‘महासभाओं की निष्क्रीयता से बे परवाह होता जा रहा था, लोगों ने यह मान लिया था कि ‘महासभाओं से कोई सहुलियत ही नहीं मिलती है तो ,हमें महासभा से क्या लाभ ?


यह सोच मन में घर कर गयी थी, लेकिन इस अंधेरे से बाहर निकालने का कार्य, इस आशा भरी ज्योत को पुन:प्रज्वलित नारीशक्ति, के निर्मल हृदय ने किया है,बल्किअन्य ‘महासभाओं के लिए प्रेरणार्थक है ,ऐसे रचनात्मक समर्पित भाव ही समाज के अस्तित्व को मजबूती प्रदान करेगा और यही सामाजिक सरोकार की बुनियाद है, जो सराहनीय है!

बालमुकुंद नागर (धाकड़ )
72 मातृआश्रय लिम्बोदी इन्दौर (म. प्र.)

Hemant Katuke - Skyrites MicrotechsShivani beauty parlor

Author: बालमुकुंद नागर (धाकड़ )