एकता में शक्ति है (3K)

by Indu Pataiya


Posted on 2017-06-20



मिलजुल कर कार्य करने की शक्ति को ही संगठन या एकता कहते है | संगठन सब प्रकार की शक्तियों का मूल है | कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी समृद्ध हो , शक्तिशाली हो अथवा बुद्धिमान हो , अकेले अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति नही कर सकता है | वह केवल दुसरो के सहयोग से ही अपनी आवश्यकताओ को पूरा कर सकता है | कोई भी परिवार, समाज तथा राष्ट्र अपनी उन्नति संगठित हुए बिना नही कर सकता है | बिना संगठन के कोई भी कार्य संभव नही है | यह हम भली – भांति जानते है कि सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण भी पाँच तत्वों के मेल से हुआ है |

संगठन में असीमित शक्ति होती है | संगठित होकर ही कोई भी समाज सुख – समृद्धि तथा सफलता को प्राप्त कर सकता है | ऐसे अनेक उदाहरण हमारे सम्मुख है जो इस बात के प्रमाण है | अकेले धागे को कोई भी आसानी से तोड़ सकता है परन्तु अनेक धागों के मेल से बनी रस्सी द्वारा बड़े-से-बड़े हाथी को आसानी से बाधा जा सकता है | अकेली पानी की बूंद का कोई महत्त्व नही होता यदि जब ये बूंदे मिलकर नदी का रूप धारण कर लेती है तो वह नदी अपनी प्रवाह के रास्ते में आने वाले बड़े-से-बड़े पेड़ो और शिलाओं (चट्टानों) को भी बहा ले जाती है | इतिहास साक्षी है कि जो देश , जातियाँ तथा कुटुम्ब जिनते अधिक संगठित रहे है उनका संसार में उतना ही अधिक बोलबाला रहा है |

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