सामाजिक बदलाव

युग दृष्टा पंडित आचार्य श्री राम शर्मा जी का कथन है कि –

“बदलाव! बदलाव!! बदलाव!!! उच्च स्तरीय बदलाव – समय बदलाव ” यहाँ होंगी अगले समय की प्रकृति और नियति | मनुष्यो में जिनमे मनुष्यता जीवित होंगी, वे ही यही सोचेंगे – यही करेंगे ।

अतः पूरी प्रकृतिमें विश्व में, राष्ट्र में, समाज में, बदलाव होता है, हो रहा है और बदलाव होकर रहेगा। हर व्यक्ति में बदलाव होगा, परिवारों में बदलाव होगा, और समाज में बदलाव होगा।

के.एल. पटेल

हमारा किराड़-किरात समाज भी इस प्रक्रिया से वंचित नहीं है , होना भी है , हर व्यक्ति में परिवर्तन अपने तक सिमित रह सकता है, पर समग्र स्तरपर तो समूह ही सक्षम होता है, यहाँ कहे की सामाजिक संघटन ही सक्षम होता है। जिन महा पुरुषो ने ५० वर्षा पूर्व किराड़ समाज का संघटन बनाया वे सभी किराड़ समाज के इतिहास में अमर रहेंगे। पर समय बदला परस्थिति बदली संघटन में विसंगतियों ने जन्म ले लिया । हुआ क्या? आप सभी देख रहे है ..

व्यास जी ने लिखा है कि :-

वहव: यत्र नेतार: वहव: मानकाशिन:।

सर्वे महात्वमिच्छन्ति स दल अवसीदति।।

अतः जहाँ बहुत लोग नेता बने, जहाँ बहुतों की महत्वाकांक्षा यश लिप्सा हो वह दल अन्तत: अवनीत करता है। या समाप्त हो जाता है।

हमारे मुख्य मूल संगठन में भी यही हुआ कुछ वर्षो पूर्व ऐसी विसंगतियां सामने आई कि-मूल संगठन से एक  संगठन और बन गया । कहा जाता है की- वर्त्तमान में किराड़ समाज की जनसंख्या लगभग आठ लाख है । देश का एक बड़ा समूह है इसकी एकता एवं अखण्डता कायम रहना चाहिए। उन विसंगतियों का सामूहिक किया जाये और सर्व हिताय की भावना से सभी के साथ एक दूसरे की सहकारिता स्वीकारते हुये समाज के दोनों वर्गीकृत संगठन एक होकर एकीकृत स्वरुप को देश के पटल पर कायम करें । संगठन का सविधान, नियम कानून समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी के साथ-साथ सभी के हित के भावनाओं को समेटे होना जरूरी है । इसके लिये कुछ बदलाव जरूरी है । समाज के संगठन में चुनाव प्रक्रिया में परिवर्तन की आवश्यकता है । चुनाव प्रक्रिया संगठन के वर्तमान राष्ट्रीय के इर्द गिर्द घूमती है, जैसा सम्माननीय चाहते है वैसी व्यवस्था तत्काल सभी के सहयोग से कर ली जाती है । पर यह प्रक्रिया परदर्शिता पूर्ण नहीं कही जा सकती है । इसके लिये संगठन के महाधिवेशन में नवीन चुनाव के साथ ही- चुनाव समिति बनाईं जावे, इस में चयनित सदस्य संगठन के अन्य पदों पर न रहें । इस सेमिति का ही कार्य हो, संगठन का सदस्यता अभियान चलाना, समय पर नियमानुसार महाधिवेशन बुलाकर पारदर्शिता पूर्ण ढंग से चुनाव कराना ।

साथ ही किरार समाज के संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष पुरूष वर्ग से ही होते है । महिला प्रकोष्ठ अवश्य रहता है जिसका राष्ट्रीय अध्यक्ष होता है, उस प्रकोष्ठ की कार्यकारिणी अलग होती है पर यह राष्ट्रीय अध्यक्ष, मूल संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अधीन रहता है । यह महिला वर्ग के प्रति न्याय संगत नहीं है । महिला वर्ग की उपेक्षा है । महिलाओँ की सहभागिता अधिक नही रह पाती है । अत: महिला प्रकोष्ठ न बनाया जाये राष्ट्रीय अध्यक्ष एक ही हो, कार्यकारिणी भी एक ही हौ । उसका स्वरूप बृहत किया जावे तभी महिलाओं की बराबरी की हिस्सेदारी होगी और समाज का विकास होगा । समानता का वातावरण बनेगा, समाज उत्कृष्ट बनेगा । हम सभी सुखी और संपन्न होगें, हमारी समाज विकासशील समाज कहलाएगा।

के.एल. पटेल

(सेवा निवृत्त प्राचार्य )

37ए, रजत विहार होशंगाबाद रोड,

भोपाल मौ. 9425439943

Hemant Katuke - Skyrites MicrotechsShivani beauty parlor

Author: Kirad