सशक्त नारी, सशक्त समाज

सशक्त नारी, सशक्त समाज


सशक्त नारी – सशक्त समाज,
संस्कारों की मर्यादा से , संवारेगी हमारा समाज !
पने स्वाभिमान की रक्षा कर ,
कलंकित न होने देगी,अपना जमीर !

बिखरते रिश्तों को ,
समेटने की चुनौती करेंगी स्वीकार!
नारीशक्ति के बढ़ते कदम,
तब तक न रूक पाऐंगे !
अपने लक्ष्य से नहीं भटकती,
जब तक विरासत का वैभव,
अपने कदमों में न देख पाऐंगे!

बुलंदी को छूने के लिए,
नये सफर पर निकल पड़ी है नारी,
यदि आंसमा छु भी न पाए तो,
जमी तो हमारी ही होगी!

कोशिश तो हमारी यही होगी,
जो अबूझ ख्वाब हमने देखे,
विरासत पर कामयाबी का परचम,
हम नही तो, हमारी अगली पीढ़ी देखें !

कड़ी मेहनत व हौसले से,
घटती नैतिकता से उभारेगी,
नारी शक्ति में प्रचुर है प्रतिभा, उसकी कोई मिटानही सकता आभा,
एक दिन लिखेंगी,सशक्त समाज के कामयाबी की दास्तान!
वह दिन होगा बेहतर, नारीशक्तिका दुनिया में मान-सम्मान!

बालमुकुंद नागर (धाकड़ )
72 मातृआश्रय लिम्बोदी इन्दौर (म. प्र.)

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Author: बालमुकुंद नागर (धाकड़ )