मातृशक्ति के निर्भीक नेतृत्व ने, आत्मविश्वास की ज्योत को किया प्रज्वलित

वैसे देखा जाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास में ‘अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा ‘ की अध्यक्षा श्रीमती साधना जी ने अपनी रचनात्मक पहल से नारी-शक्ति को आज के परिवेश में खड़े रहने की हिम्मत दे कर आगे बढ़ाया है। सशक्त नारी – सशक्त समाज, की भावना लिए हुए, साधना-शिव ने समाज को गर्व से भर दिया है। आज सिर्फ समाज व प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं। भविष्य में हम इस कार्यशैली को राष्ट्र नेतृत्व के रूप में भी देखना चाहेंगे? शायद वह दिन दूर नहीं, जब समाज के सारे घटक एकसूत्र – एकजुट हो कर भव्य समाज का एकीकरण कर ‘महासंघ’ बनेगा, जो राजनीति के शीर्ष पर काबिज होने का प्रयास होगा। महासभा, अध्यक्षा साधनाजी ने नारीशक्ति को अपने कार्यकाल में आत्मविश्वास की ज्योत को प्रज्वलित कर, यह प्रेरणा दी, कि निर्भीक हो कर ही आगे बढ़ा जा सकता है।


अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा, की अध्यक्षा श्रीमती साधना जी ने अपने स्वविवेक से समाज के उन समाज सेवियों को ही, अवसर प्रदान किए हैं, जो समाज सेवा की जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी के साथ कोशिश कर, समाज को आगे बढ़ाने में किया जा रहा है।

वर्तमान में मातृशक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिसमें महिला सशक्तिकरण करण की पक्षधर प्रेरणा स्त्रोत आदरणीय, फुलवंती सूर्यवंशीजी, प्रदेश अध्यक्ष वंदनाजी, उपाध्यक्ष कविताजी, पुष्पलताजी जिला अध्यक्ष निशा जी एवं अन्य पदस्थ महिलाशक्ति। राष्ट्रीय संगठन मंत्री नरेश सिंह जी ने भी समाज में संगठन मजबूत हो, उसके लिए कई आयोजन कर अपनी प्रतिभा का परिचय समर्पित सेवा दे कर समाज को प्रभावित किया है। राष्ट्रीय युवासंग अध्यक्ष राजेन्द्रजी पटेल द्वारा भी समाज की समस्याओं का हल गंभीरतापूर्वक निभा रहे हैं। जिसकी प्रशंसा व सराहना शोशल मीडिया के माध्यम से समाज को पढ़ने को मिलती है।

समाज जन जाग्रति में युवा विंग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रूपसिंहजी धाकड़ जयपुर का योगदान, किसी महासभा अध्यक्ष से कम न हो कर समाज के लिए बड़ी राहत है। जिनके माध्यम से राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आदि प्रदेशों के एडमिन होकर कई सामाजिक ग्रूप बनाकर, समाज के लोगों को शोषल मीडिया के माध्यम से जोड़ने का रचनात्मक कार्य किया है, जिससे आप -हम सब काफी नजदीकी मेहसुस कर रहे हैं। समाज के लिए ६ से 7 घंटे सतत् वाट्स एप पर अपना समय समाज को जागरूक करने एवं समाज में एक -दूसरे के सहयोग करने का भाव लिए हुए लिखते रहते है। समाज की एकजुटता के लिए बड़ा प्रयास हो कर उपलब्धि है। आज समाज शोषल मीडिया से क्षेत्रीयता में न अटक कर एक -दूसरे के नजदीक आया है। अभी तक महासभा, में सामाजिक बंधुओं द्वारा प्रयास तो हुए, लेकिन जितना आप समय देकर समाज को प्रोत्साहित कर रहे हैं, उसकी प्रशंसा करना वाजिब है ।

महासभा, में ऐसे व्यक्तित्व की कार्यशैली ही समाज सेवा के महत्व को बढ़ावा देती है। महासभा, अध्यक्षा की कार्यनीति संकीर्ण न हो कर, समाज के सभी घटकों के एकभाव्य का पक्ष रखता है।

यदि इसी प्रकार महासभा, की कार्यपद्धति रही तो हम एक दिन हमारी समाज का नेतृत्व केन्द्रिय राजनीति के शीर्ष पर होकर , राजनीति पर हमारा नियंत्रण हो सकेगा? समाज की एकजुटता पर संशय न हो कर, समाज के सारे घटक नागर-मालव, किरार, किराड़, किरात धाकड़ सब एक होंगे।
अपनी सोच को संकीर्ण न रखें । धैर्य व संयम में रहने का आत्मीय भाव ही समाज को सुसंस्कृत विस्तारित सोच की और लेकर जाएगा। प्रतिभा होते हुए भी, प्रबुद्घ लोग अपने विचारों को बौना न होने दें, तभी समाज प्रगति कर पाएगा। जब हम रिश्तों में बंध चुके हैं तो ‘महासभाओं, को एकजुट हो कर क्यों न महासंघ बने? यही समाज के लिए शक्ति संतुलन का बडा़ स्त्रोत होगा !

संगठित हुए बिना अपने अधिकारों की रक्षा करना सम्भव नही है। संघे शक्ति कलयुगे, संघे शक्ति कलयुग? संघठन का महत्व बीते हुए काल में भी था और वर्तमान में भी, उतना ही महत्वपूर्ण है। बिखरा हुआ समाज एक दिन अपना अस्तित्व खो देता है, इसलिए संगठित रहकर ही अपनी समस्याओं को हल किया जा सकता है,लेकिन पहले हमारी ‘महासभाएं, प्रबुद्घ विचारों से बिना प्रतिस्पर्धी हुए एक-दूसरे के प्रति समर्पित भाव लिए हुए एक हो। समाज के एकीकरण के लिए समझौतावादी विचारों को विकसित करें और कुछ -एक त्रूटियों को नजर अंदाज कर समाज को भव्यता दें।

अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा, ने महिला सशक्तिकरण का पक्ष रखकर, श्रीमती साधनाजी को एक शिल्पकार के रूप में चुना है, जो समाज की उत्सुकता व जिग्यासा सिर्फ समाज को वैभवशाली व सम्रद्ध दिखे। यही भाव लिए हुए विश्वास जताया था, इस जिम्मेदारी का
निर्वहन नारीशक्ति के निश्छल मन व चेतना से, अपनी वैचारिक प्रखरता से ,सृजनात्मक चिंतन से संभव हो सकेंगा।

संस्कारों की प्रबलता सही मार्ग व संतुलित आत्मानुशासन से चलने वाले को कभी दिग्भ्रमित नही होने देती। संस्कार जीवन की वह धरोहर है, जो हमेशा साथ निभाती है! यही शुद्धता से व्यक्ति रूढ़ियों से बचकर पृगति के पथ पर निरन्तर बढ़ता चला जाता है! यही आत्मीय भाव समाज को प्रभावित कर श्रेष्ठतर होने का विश्वास पैदा करता है! इन्हीं रचनाशील विचारों से समाज को
एकजुट, एकसूत्र में बांधने का प्रयास सराहनीय हो कर, भविष्य की पृगति सुनिश्चित होती है! हमारा दृष्टिकोण निराशावादी न हो कर दूरदर्शी बने नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से प्रभावित न होकर चिंतनीय होना चाहिए, जिससे हमारी समाज के प्रति आस्था व ऊर्जा बनी रहे।

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Author: बालमुकुंद नागर (धाकड़ )