माँ, की स्मृति को सदा याद रखने के लिए, समाज को दी आदर्श प्रेरणा

वर्तमान संकटमय त्रासदी कोविड -19 के दौर में माँ, गीता देवीजी का असामयिक निधन होने पर पुत्र सुनेरसिंह धाकड़ (वकील साहब) सागौर (धार) द्वारा माँ ,का मृत्युभोज न करते हुए समाज हित का ध्यान रखते हुए, 102222/-रूपये (एक लाख, दो हजार दो सौ बावीस रुपये) का दान कर समाज को आदर्श प्रेरणा दी! मनुष्य यदि जन्म लेता है तो, उसकी मृत्यु भी निश्चित है, लेकिन उसकी स्मृतिशेष को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए, उनके उत्तराधिकारी भी भावनात्मक अंतर्मन से जिम्मेदारी निभा दे तो, माता -पिता की स्मृति समाज के मानसपटल पर सदा के लिए, अमर हो कर प्रेरणा बन जाती है!

आपके विचारों में छिपि आत्मीयता माँ, के सम्मान की श्रेष्ठता के समकक्ष है ! व्यक्तित्व के भाव आंतरिक मन से निकल कर ही भावनात्मक संदेश देते हैं, जिससे मन प्रफुल्लित हो कर, अपने आप में सुकून का भाव जागृत होता है!

दुनिया में माँ से बढ़कर कोई दौलत नही, माँ का हृदय कोमल भावुक व ममत्व से परिपूर्ण होता है, माँ की स्मृति विशेष को संजोए रखना ही, माँ की पूजा है, माँ से बढ़कर कोई धरोहर या दौलत नही हो सकती है, माँ के प्रेम, करूणा एवं त्याग को शब्दों में सहेज पाना मुश्किल है, ऐसी ममतामयी स्वरूप को सदैव ही हमारे मन पर अंकित रहना माँ, की स्मृति विशेष को सहेजे रखना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है!

मृत्युभोज एक महाखर्चिलि व्यवस्था है, जिसके कारण आर्थिकता के बोझ तले दबा व्यक्ति हमेशा दबा रहता है!

वर्तमान परिवेश में खड़े रहने के लिए, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में दाखिल करवाने के लिए, आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होनी चाहिए, तभी आप दुनिया की दौड़ में सम्मिलित हो कर प्रगति का रास्ता ढूंढ सकते हैं, अन्यथा हम दूसरे समाज के विकसित बच्चों को देखकर हीन भावना से ग्रसित होते रहेंगे! जीवन तो सभी जी लेते हैं, लेकिन प्रगति की प्रतिस्पर्धी दौड़ में सम्मिलित हुये बिना ही, आर्थिक कमजोरी जीवन को लील जाती है! सारे प्रगति के द्वार प्रतिभा होते हुए भी बंद हो जाते हैं! प्रतिभा सिकुड़ कर मन मसोस कर ही जीवन गुजारती है, लेकिन परिस्थितियों को विपन्न व विषम बनाने में भी, हम ही जिम्मेदार है! रूढ़ियों का बोझ ढोना हमने ही बढ़ाया है!

भोज को महाभोज बनाने में प्रतिस्पर्धी हम ही हुए हैं! अब हमें समय के साथ चलने के लिए, अपने को बदलना होगा!

समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन में दृढ़निश्चयी फेसले लेना होंगे, जो मौजूदा विसंगतियां को नकार कर, स्वविवेक से निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता विकसित हो, जो समाज के लिए पथ-प्रदर्शक व समाज विकास में मील का पत्थर साबित हो कर हमारा मार्गदर्शक बने!

जिस प्रकार हमारे वकील साहब सुनेरसिंहजी धाकड़ द्वारा अपनी स्वर्गीय माँ, की स्मृति में 102222/-रूपये (एक लाख दो हजादान स्वरूप समाज को भेंट किये हैं ,उसमें से आधा यानी 51111/-रूपये (इक्यावन हजार एक सौ ग्यारह रूपये) स्व. दादा निभयसिंहजी पटेल परमार्थिक ट्रस्ट पिपलियाराव इंदौर को छात्रावास निर्माण हेतु, भेंट किया गया और आधा रूपया 51111/-रूपये (इक्यावन हजार, एक सौ ग्यारह रूपये) सागौर (छोटी) में धर्मशाला निर्माण हेतु, दिया गया है दिनांक 18-10-2020 को समाज की उपस्थिति पगड़ी रस्म के कार्यक्रम में ! इस प्रकार की आदर्श प्रेरणा ही समाज को प्रभावित करती है और उन्हीं लोगों को याद रखा जाता है, जिनके त्याग व कर्मों की श्रेष्ठता से अपने बच्चों के द्वारा परोपकार की भावना लिए हुए, उनकी स्मृति यों को समाज हमेशा याद रखे! र दो सौ बावीस रूपये)

समाज का भविष्य ऐसे प्रयासों से ही आप -हम सब मिलकर तय कर सकते हैं आपके थोड़े से सार्थक दान से? अपने पूर्वजों की याद अविस्मरणीय बनाई जा कर, समाज में भव्य निर्माण स्थापित किए जा सकते हैं! अपनी समृद्धि का प्रदर्शन ही करना हो तो, अपने पूर्वजों की स्मृति विशेष में समाज को आर्थिक योगदान दें, जिससे आपको और आपके परिवार को समाज आदर के साथ श्रद्धा की दृष्टि से देखें !

जब समाज में रचनात्मक कार्य की शुरुआत होती है तो, स्वीकारने वालों की संख्या कम नहीं पड़ना चाहिए!

समाज ईश्वर में आस्था रखें, लेकिन आर्थिक समृद्धि के लिए, रूढ़ियों को नकारना भी प्रारंभ करे! सामाजिक अर्थ व्यवस्था को मजबूत किए बिना, अपने बेटे एवं बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी नहीं किया जा सकता है!

आने वाली पीढ़ी को समाज के द्वारा दी गई सहुलियत ही, उनके विकास में सहयोग प्रदान करेगी !

हम सुनेरसिंह धाकड़ (वकील साहब) के इस दु:ख में परिवार के साथ सहभागी हैं और ईश्वर से शोक संतप्त परिवार की असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें !

दिवंगत आत्मा को विनम्र भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके चरणों में भाव -पुष्प श्रद्धा सुमन ! धन्यवाद
लेखक: बालमुकुंद नागर (धाकड़)
72 मातृ आश्रय लिम्बोदी इन्दौर ,म. प्र.
9575982454

Shivani beauty parlorHemant Katuke - Skyrites Microtechs

Author: बालमुकुंद नागर (धाकड़ )